Thursday, May 18
Sunday, July 5
gaurav krishna goswami ji is a devote of shri radha rani and bankey bihari.near of holi festival of 2010.he had Miracle(marvel) with him.he was doing service(सेवा) of thakur ji.he was clamping(press) legs of thakur ji and also he massage(friction) legs of thakur ji.but when he took perfume of Saffron(केसर ) he think that at this time there is not winter(because saffron perfume gives heat in winter).if he will use it thakur ji will get more heat that will be not good.than he think about perfume of rose (which will give coldness to thakur ji).but there were not any perfume bottle of rose.then suddenly store keeper of bankey bihari temple came and said-"take perfume of rose".for your information gaurav ji yet not told anyone to give him prefume of rose.the gaurav krishna ji asked that whom have given you this?then he replied a child,standing out side of temple,has given him perfume.then gaurav ji sais him that i want to meet him.but the child was gone.
in this miracle the child is bankey bihari who came as a child to give perfume to shri gaurav krishna ji.then shri gaurav krishna ji weeped a lot in the memory of shri bankey bihari who came near of him.
Saturday, January 11
श्री भीष्म उवाच - (here is some of sloka's of stuti by their no. in shrimad bhagtwat)
इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वत पुङ्गवे विभूम्नि ।
स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिमुपेयुषि यद्भवप्रवाहः ॥१॥
स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिमुपेयुषि यद्भवप्रवाहः ॥१॥
Let me being freed from desires prepare my mind for the Supreme Lord, the Leader of the Devotees, the Great Self-contented One who in the realization of His transcendental joy at times [as an avâtara] takes pleasure in accepting this material world with her creation and destruction.
Friday, January 10
हनुमान कौन है?
- हनुमान -जिन्होंने अपना अभिमान ख़त्म कर दिया ।
- वर्ण के आधार पर हनुमान का अर्थ-
ह-जिस व्यक्ति के जीवन का द्रष्टि कोण सकारात्मक है । (गुजराती का शब्द -हकारात्मक )
नु-जो स्वप्न में भी किसी के नुक्सान करने का नहीं सोचता ।
मा-जिसको मान नहीं है ।
न-नम्रता(नम्रता की मूर्ति),विनम्र, जिसका जीवन सरल है ।
- श्रीराम हनुमानजी से-
श्रीराम-आप कौन है ?
हनुमानजी- मै,- स्थूल रूप से-आपका दास हूँ ।(राम दूत मै मातु जानकी -सुन्दरकाण्ड )
- जीव रूप से-आपका अंश हूँ ।(ईश्वरअंश जीव अविनाशी )
- अध्यात्मिक रूप से-आप और मुझ में कोई अंतर नहीं है ।(नारद भक्ति सूत्र)
- हनुमान चालीसा में हनुमान शब्द-
1. ईश्वर,ब्रहम,परमात्मा,भगवान हनुमान है |
2.मान, बुद्धि,चित,अहंकार हनुमान है |
3.नाम,रूप,लीला,धाम हनुमान है |
4.धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष हनुमान है |
5.सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग,कलयुग में भी हनुमान |
6.ब्राहमण है,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र हनुमान है |3.नाम,रूप,लीला,धाम हनुमान है |
4.धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष हनुमान है |
5.सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग,कलयुग में भी हनुमान |
shri hanuman chalisa-
।।दोहा।। श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारी |
बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि |
बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार |
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार ||
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर |
रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा ||
महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी |
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा ||
हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे |
शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन ||
विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर |
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया ||
सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा |
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे ||
लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये |
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई ||
सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें |
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ||
जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते |
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ||
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना |
जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु ||
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं |
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||
राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे |
सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना ||
आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हाँक ते काँपे |
भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें ||
नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा |
संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें ||
सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा |
और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे ||
चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा |
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ||
तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें |
अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ||
और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई |
संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा ||
जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं |
जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई ||
जो यह पाठ पढे हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा |
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ||
।।दोहा।। पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप |
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ||
Monday, December 16
(1) Sada mere dil ko teri aahat rahe
kripa ki teri najare yuhi kayam rahe
teri ankhiyon se nor sada barsta rahe
teri payal our bansi yunhi bajati rahe
सदा मेरे दिल को तेरी आहट रहे
कृपा की तेरी नजरे युही कायम रहे
तेरी अखियो से नूर सदा बरसता रहे
तेरी पायल और बंसी युही बजती रहे
(2) prem jivan me rain basera rahe
ek pal bhi mera tujh se juda na rahe
akhiyan se anshu pravah ham kare
teri payal our banshi yunhi bajati rahe
प्रेम का जीवन में रैन बसेरा रहे
एक पल भी मेरा तुझसे जुदा ना रहे
अखियन से आँसू प्रवाह हम करे
तेरी पायल और बंसी युही बजती रहे
(3) teri karuna ki barsat ham par hoti rahe
suman sa mahake ye ghar ka aangan
tere swagat me push varsha hoti rahe
teri payal or banshi yunhi bajati rahe
तेरी करुणा की बरसात हम पर होती रहे
सुमन सा महके ये घर का आगन
तेरे स्वागत में पुष्प की वर्षा होती रहे
तेरी पायल और बंसी युही बजती रहे
(4) satyta se jivan ham yapan kare
munh me madhuray ras ghulta rahe
yah meri fariyad puri kare
satya prem karuna se jivan mahakta rahe
radhey teri payal shyam teri banshi yunhi bajati rahe
सत्यता से जीवन हम यापन करे
मुँह में माधुर्य रस घुलता रहे
यह मेरी फरियाद पूरी करे
सत्य प्रेम करुणा से जीवन महकता रहे
राधे तेरी पायल श्याम तेरी बंसी युही बजती रहे
यह मेरी फरियाद पूरी करे
सत्य प्रेम करुणा से जीवन महकता रहे
राधे तेरी पायल श्याम तेरी बंसी युही बजती रहे
Friday, August 9
Hariyali Teej or Hariyali Teej Vrat (Singhara Teej or Teejan) is a vrat or puja observed on the third day just after Hariyali Amavasya, in Shravan Month
(July – August) of North Indian Hindi calendar. In 2013 Hariyali Teej
date is 9th august . This vrata is dedicated to Lord Shiva and
Goddess Parvati. It is observed mainly by married and unmarried women of
Rajasthan, Uttar Pradesh, Bihar, Madhya Pradesh




