प्रेम जीवन का विशुद्ध रस । प्रेम माधुरी जी का सान्निध्य जंहा अमृत के प्याले पिलाए जाते है ।प्रेम माधुर्य वेबसाइट से हमारा प्रयास है कि इस से एक संवेदना जागृत हो ।

Friday, February 3

गौर-श्याम बदनारबिंद










 गौर-श्यामबदनारबिंद पर जिसको बीर मचलतेदेखा |
नैन बान, मुसक्यानसंग फँसफिर नहिनेक सम्भलतेदेखा ||
ललितकिसोरी जुगल इश्कमें बहुतोका घरघलते देखा|
डूबा प्रेमसिन्धु काकोई हमनेनहीं उछलतेदेखा ||
देखौ री, यहनन्द काचोर बरछीमारे जाताहै |
बरछी-सी तिरछीचितवन कीपैनी छुरीचलाता है||
हमको घायल देखबेदरदी मंदमंद मुसुकाताहै |
ललितकिसोरी जखम जिगरपर नौनपुरीबुरुकता है||
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प्रेमसमुद्र रुपरस







प्रेमसमुद्र रुपरस गहिरे, कैसी लागैघाट |
बेकारयो दै जानिकहावत जानिपनोकी कहापरी बाट||
काहू को सरपरै सूधो, मारतगाल गलीगली हाट|
कहि हरिदास बिहारीहिजानौ, तकौ  औघट घाट||
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shri swami haridas ji's pad

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ब्रंदाबन सों बन उपबन सों,






मन लगाई प्रीतिकीजै करकरवा सों, ब्रजबीथिन दीजै सोहिनी |
ब्रंदाबन सों बनउपबन सों, गुंज मालकर पोहिनी||
गो गोसुतन सोंमृग मृगसुतनसों, औरतन नेक जोहिनी|
श्रीहरिदास के स्वामीश्यामा कुंजबिहारीसों, चितज्यों सिरपरदोहिनी ||
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काहूको बस नहीं तुम्हारी कृपा ते

  




काहूको बसनहीं तुम्हारीकृपा ते, सब होयबिहारी बिहारिनि|
और मिथ्या प्रपंचकाहे कोभाषिये, सोतो हैहारनि ||
जाहि तुमसो हितताहि तुमहित करो, सब सुखकारनि |
श्रीहरिदास के स्वामीश्यामा कुंजबिहारी,प्राननिके आधारनि|| 
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ज्योही ज्योही तुम




ज्योही ज्योही तुमराखत होत्योही त्योहीरहियतु हैहो हरि|
और अचरचै पाईधरो, सुतो कहोकौन केपैड भरि||
जदपि हों अपनोभयो कियोचाहो, कैसेकरि सकोजो तुमरखो पकरि|
कहि हरिदास पिंजराके जनावारलो, तरफराइ रह्योउडिबे कोकितो उकरि||
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हित तौ कीजै कमलनैन सों














हित तौ कीजैकमलनैन सों, जा हितआगे औरहित लागोफीको |
कै हित कीजैसाधुसंगतिसों, जावै कलमष जी को||
हरिको हित ऐसोजैसो रंग-मजीठ, संसर्हितकसुन्भी दिनदुतीको |
कहि हरिदास हितकीजै बिहारीसोंऔर निबाहु जानिजी को||
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